CG Bhuiya | भुइयाँ : छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख गाइड 2026

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छत्तीसगढ़ शासन के भू-अभिलेख पोर्टल के लिए सबसे सटीक जानकारी। अपनी कृषि भूमि, खेत या प्लॉट का खसरा B1, पी-II और नक्शा ऑनलाइन डाउनलोड करने की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझें।

खसरा / B1 रिपोर्ट

अपनी ज़मीन का अधिकार अभिलेख (खसरा B1) डिजिटल हस्ताक्षर के साथ पीडीएफ फॉर्मेट में डाउनलोड करें।

रिपोर्ट निकालें ➔

भू-नक्शा (Map)

खसरा नंबर डालकर अपने खेत या ज़मीन का नक्शा ऑनलाइन देखें और उसका प्रिंट आउट प्राप्त करें।

नक्शा देखें ➔

नामांतरण स्थिति

फौती या क्रय-विक्रय के बाद नामांतरण (Mutation) या बंटवारे के आवेदन की वर्तमान स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक करें।

ट्रैक करें ➔

राजस्व न्यायालय

राजस्व न्यायालय (Revenue Court) में चल रहे ज़मीन के मुकदमों, पेशी की तारीख और अंतिम आदेश की कॉपी देखें।

e-Court ➔

फसल विवरण (P-II)

गिर्दावरी के बाद आपकी ज़मीन पर बोई गई फसल (धान, मक्का आदि) का विवरण चेक करें।

विवरण देखें ➔

अभिलेख दुरुस्ती

खसरे में नाम या रकबा सुधार के लिए ऑनलाइन आवेदन करें और अपनी ज़मीन के रिकॉर्ड की त्रुटियों को ठीक करवाएं।

सुधार आवेदन ➔
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भुइयाँ (CG Bhuiya) पोर्टल क्या है? एक संपूर्ण जानकारी

छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व विभाग (Revenue Department) द्वारा शुरू किया गया भुइयाँ (Bhuiyan) पोर्टल राज्य के भू-अभिलेखों (Land Records) का एक डिजिटल और पारदर्शी ऑनलाइन डेटाबेस है। इसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा डिज़ाइन और मेंटेन किया जाता है। इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य राज्य के नागरिकों और किसानों को उनकी ज़मीन से जुड़े सभी दस्तावेज़ (जैसे खसरा, खतौनी, नक्शा) बिना किसी सरकारी कार्यालय के चक्कर लगाए, सीधे उनके मोबाइल या कंप्यूटर पर उपलब्ध कराना है।

पहले किसानों को अपनी ज़मीन का एक साधारण सा कागज़ निकालने या उसमें सुधार करवाने के लिए महीनों तक पटवारी (लेखपाल) और तहसील के चक्कर काटने पड़ते थे। लेकिन अब "डिजिटल इंडिया" पहल के तहत छत्तीसगढ़ के सभी 27+ जिलों का भू-अभिलेख पूरी तरह से कम्प्यूटरीकृत (Computerized) कर दिया गया है।

💡 B1 और P-II में क्या अंतर है? (ज़रूरी जानकारी)
  • खसरा (B1 - अधिकार अभिलेख): यह ज़मीन का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है, जिसमें ज़मीन के असली मालिक का नाम, पिता का नाम, और ज़मीन का कुल रकबा (Area in Hectare) दर्ज होता है। इसे ज़मीन का 'पहचान पत्र' मान सकते हैं। बैंक लोन या ज़मीन की बिक्री के लिए यह अनिवार्य है।
  • खतौनी (P-II - फसल विवरण): यह दस्तावेज़ बताता है कि उस ज़मीन (खसरे) पर किस मौसम में कौन सी फसल बोई गई है (जैसे- धान, गेहूं, चना)। बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाने या सरकारी समितियों (सोसाइटी) में समर्थन मूल्य (MSP) पर धान बेचने के लिए P-II अनिवार्य है।
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ऑनलाइन खसरा (B1) और खतौनी (P-II) कैसे डाउनलोड करें? (Step-by-Step)

आप बिना किसी चॉइस सेंटर (CSC) या पटवारी के पास गए, घर बैठे अपने मोबाइल से डिजिटल हस्ताक्षर वाला B1 निकाल सकते हैं। बस इन आसान चरणों का पालन करें:

  1. आधिकारिक पोर्टल पर जाएँ: सबसे पहले अपने ब्राउज़र में छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख की आधिकारिक वेबसाइट bhuiyan.cg.nic.in खोलें।
  2. नागरिक सुविधाएँ (Citizen Services): होमपेज पर थोड़ा नीचे स्क्रॉल करें, आपको "नागरिक सुविधाएँ" का एक बॉक्स मिलेगा। उसमें "डिजिटल हस्ताक्षर युक्त B1/P-II आवेदन" के विकल्प पर क्लिक करें।
  3. गाँव का विवरण भरें: एक नया पेज खुलेगा। वहां अपना ज़िला (District), तहसील (Tehsil), राजस्व निरीक्षक मंडल (RI Circle) और गाँव (Village) का नाम ड्रॉपडाउन लिस्ट से चुनें।
  4. ज़मीन खोजें (खसरा या नाम): अब आप अपनी ज़मीन को सीधे 'खसरा नंबर' डालकर खोज सकते हैं। यदि आपको खसरा नंबर याद नहीं है, तो 'नाम वार' विकल्प चुनें और ज़मीन मालिक के नाम के शुरुआती हिंदी अक्षर टाइप करके खोजें।
  5. रिपोर्ट डाउनलोड करें: सही नाम और खसरा नंबर सामने आने के बाद, उसे सेलेक्ट करें। अपना मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी (वैकल्पिक) दर्ज करें। इसके बाद नीचे दिए गए "B1 डाउनलोड करें" या "P-II डाउनलोड करें" बटन पर क्लिक करके PDF फ़ाइल को अपने डिवाइस में सेव कर लें।
⚠️ डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signature) का महत्व: ध्यान रखें कि बिना डिजिटल साइन वाले सादे प्रिंटआउट (साधारण कॉपी) को बैंक, तहसील या कोर्ट में सरकारी दस्तावेज़ के रूप में मान्य नहीं माना जाता है। हमेशा पोर्टल से "डिजिटल हस्ताक्षर युक्त" (Digitally Signed) दस्तावेज़ ही डाउनलोड करें। इस दस्तावेज़ के नीचे एक बारकोड (Barcode) और एक हरा टिक (✔) लगा होता है। डिजिटल सिग्नेचर होने के बाद आपको उस कागज़ पर पटवारी के सील या साइन लगवाने की कोई ज़रूरत नहीं है।

भू-नक्शा (CG Bhu-Naksha) कैसे देखें?

खसरे के अलावा, यदि आप अपनी ज़मीन का आकार, उसकी चौहद्दी (आसपास किसकी ज़मीन है), और रास्ता देखना चाहते हैं, तो इसके लिए भू-नक्शा पोर्टल का उपयोग किया जाता है।

  • इसके लिए अलग पोर्टल bhunaksha.cg.nic.in पर जाना होता है।
  • वहाँ अपने गाँव का चयन करें। स्क्रीन पर पूरे गाँव का नक्शा खुल जाएगा।
  • उस नक़्शे में अपने 'खसरा नंबर' वाले डिब्बे पर क्लिक करें।
  • बाईं तरफ प्लॉट की पूरी जानकारी आ जाएगी। नीचे दिए गए 'Map Report' विकल्प पर क्लिक करके आप उस ज़मीन के नक़्शे का पीडीएफ प्रिंट निकाल सकते हैं।
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नामांतरण (Mutation) और अभिलेख दुरुस्ती (Record Correction)

ज़मीन से जुड़े दो सबसे महत्वपूर्ण शब्द जो आपको बार-बार सुनने को मिलेंगे, वे हैं नामांतरण और दुरुस्ती। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं:

1. नामांतरण (Mutation) क्या है?

जब आप कोई ज़मीन खरीदते हैं, या पिता/दादा की मृत्यु के बाद पैतृक ज़मीन का बँटवारा होता है, तो राजस्व रिकॉर्ड (B1) में पुराने मालिक का नाम हटाकर नए मालिक (आपका) का नाम चढ़ाने की कानूनी प्रक्रिया को 'नामांतरण' कहते हैं। नामांतरण मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है:

नामांतरण का प्रकार कब होता है? आवश्यक दस्तावेज़ (Required Documents)
पंजीकृत (रजिस्ट्री) नामांतरण ज़मीन खरीदने या बेचने पर रजिस्ट्री की मूल कॉपी (Sale Deed), पुराना खसरा (B1), आधार कार्ड।
फौती नामांतरण (उत्तराधिकार) ज़मीन मालिक की मृत्यु हो जाने पर मालिक का मृत्यु प्रमाण पत्र, ग्राम पंचायत का वंशावली (Family Tree), शपथ पत्र।
बंटवारा (Partition) परिवार के सदस्यों के बीच ज़मीन बाँटने पर सभी सदस्यों की सहमति वाला 100 रुपये के स्टाम्प पर शपथ पत्र (Affidavit), पंचनामा।

प्रक्रिया: अब नामांतरण के लिए आपको सीधे तहसील जाने की ज़रूरत नहीं है। आप लोक सेवा केंद्र (चॉइस सेंटर) से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के बाद तहसीलदार एक "इश्तहार" (Notice) जारी करता है। अगर 15 से 30 दिन के भीतर कोई आपत्ति नहीं आती, तो नया नाम भुइयाँ पोर्टल पर अपडेट कर दिया जाता है।

2. अभिलेख दुरुस्ती (Record Correction)

यदि भुइयाँ पोर्टल पर आपके खसरे में आपका नाम गलत दर्ज हो गया है (स्पेलिंग मिस्टेक), पिता का नाम गलत है, या ज़मीन का रकबा (Area) कम या ज्यादा दिखा रहा है, तो इसे ठीक करवाने की प्रक्रिया को अभिलेख दुरुस्ती कहते हैं। इसके लिए आपको अपने आधार कार्ड और पुराने सही दस्तावेज़ों के साथ पटवारी या तहसीलदार को सुधार के लिए आवेदन देना होता है।

किसान, गिरदावरी (Girdawari) और आधार लिंकिंग

छत्तीसगढ़ में धान की खेती प्रमुखता से होती है। सरकार समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदती है। इसके लिए दो चीज़ें बहुत ज़रूरी हैं:

  • गिरदावरी: पटवारी हर मौसम में खेतों में जाकर यह दर्ज करता है कि किस खसरे में कौन सी फसल बोई गई है। इसे पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। यदि आपके P-II में धान की फसल दर्ज नहीं होगी, तो आप सोसायटी में धान नहीं बेच पाएंगे।
  • आधार लिंकिंग: पीएम किसान सम्मान निधि (PM Kisan) और अन्य सरकारी सब्सिडी का सीधा लाभ पाने के लिए अब भुइयाँ पोर्टल पर आपके खसरे के साथ आपके आधार कार्ड (Aadhaar Card) का लिंक होना अनिवार्य कर दिया गया है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या ऑनलाइन डाउनलोड किया गया खसरा (B1) और खतौनी हर जगह मान्य है?
हाँ, भुइयाँ पोर्टल से डाउनलोड किया गया 'डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signed)' वाला B1/P-II सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत हर सरकारी और गैर-सरकारी कार्य (जैसे बैंक लोन, ज़मीन की रजिस्ट्री, ज़मानत, ज़मानतदारी) के लिए पूरी तरह से मान्य है।
भू-नक्शा (Bhu-Naksha) और भुइयाँ (Bhuiya) पोर्टल में मुख्य क्या अंतर है?
भुइयाँ (bhuiyan.cg.nic.in) पोर्टल पर ज़मीन के दस्तावेज़ टेक्स्ट फॉर्मेट में मिलते हैं (खसरा, खतौनी, मालिक का नाम, रकबा)। जबकि भू-नक्शा (bhunaksha.cg.nic.in) पोर्टल पर उस ज़मीन की सीमाओं और आकार को दर्शाने वाला ग्राफिकल नक़्शा (Map) देखा और प्रिंट किया जाता है।
भुइयाँ पोर्टल पर मोबाइल नंबर दर्ज करना क्यों अनिवार्य है?
दस्तावेज़ डाउनलोड करते समय मोबाइल नंबर दर्ज करना एक सुरक्षा प्रक्रिया (Security Check) है। भविष्य में यदि आपकी ज़मीन के रिकॉर्ड में कोई भी बदलाव (जैसे नामांतरण) होता है, तो राजस्व विभाग द्वारा आपको सीधे उसी नंबर पर SMS के माध्यम से अलर्ट भेजा जा सकता है।
'मिसल बंदोबस्त' (Misal Bandobast) क्या होता है और इसकी क्या आवश्यकता है?
मिसल बंदोबस्त अंग्रेज़ों के समय (1929-1945 के आस-पास) का ज़मीन का पुराना रिकॉर्ड होता है। जब छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाण पत्र (विशेषकर ST/SC/OBC) बनवाया जाता है, तो यह साबित करने के लिए कि आपका परिवार 1950 या 1984 से पहले से यहाँ निवासरत है, मिसल रिकॉर्ड की मांग की जाती है। यह भी भुइयाँ पोर्टल पर उपलब्ध है।
मोबाइल पर वेबसाइट सही से काम नहीं कर रही, क्या इसका कोई ऐप (App) है?
हाँ, किसानों की सुविधा के लिए छत्तीसगढ़ सरकार (NIC) ने "CG Bhuiyan" नाम से एक आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन (Android App) भी जारी किया है। आप इसे Google Play Store से बिलकुल मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं और सारी जानकारी ऐप पर भी देख सकते हैं।